किसी गांव में दो भाई रहते थे। एक का नाम मीरकासिम और दूसरे का नाम अली खान था, जो छोटा भाई था एवं लोग इसे अलीबाबा कहकर भी बुलाते थे। मीरकासिम बहुत ही धनवान था और अलीबाबा बहुत ही निर्धन था। अलीबाबा लकड़ी काटकर लाता था और उसे बेचकर अपना जीवन यापन करता था।
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बुधवार, 15 नवंबर 2017
शुक्रवार, 10 नवंबर 2017
एक बंदर और मगरमच्छ की कथा - हिंदी कहानी
एक बंदर नदी के किनारे एक आम के पेड़ पर रहता था। वह प्रतिदिन पेड़ से आम मौसम पर मीठा खाता था और अपने मित्र मगरमच्छ को भी खिलाता था। उसका मित्र मगरमच्छ उसे बहुत प्यार करता था।
गुरुवार, 9 नवंबर 2017
ब्यूटी और गुलाब की कथा - हिंदी कहानी
प्राचीन काल में एक सौदागर के तीन लड़कियाँ थी। सौदागर नाकुरी छोड़कर घर बैठे हुए थे। वह किसी दुसरे नॉकरी की तलाश में था।
बुधवार, 8 नवंबर 2017
विश्वस्नीय शेर - हिंदी कहानी - लघु कथा
अंडलोकल्स नाम का एक लड़का इंग्लैण्ड के राजा के यहां नॉकरी करता था। वह बहुत समय के बाद राजा के यहां नॉकरी छोड़कर भागते भागते रेगिस्तान होते हुए बहुत दूर एक जंगल में जा छिपा। जंगल में एक शेर आह भरता हुआ कहरता हुआ एक पैर उठाये चले आ रहा था। यह देखकर पहले तो एण्डलोकल्स डर गया, परंतु फिर उसने सोचा यहां से भागकर कहां जाया जाय। वो हिम्मत करके शेर के पास गया और उसके पैर में चुभा काँटा निकाल दिया और जड़ी बूटी का लेप भी लगा दिया।
इसका मतलब शेर भी इतना विश्वनीय होता है कि अपना खूंखार लक्षण छोड़कर दोस्ती का फर्ज निभाता है।
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विश्वस्नीय शेर - हिंदी कहानी - लघु कथा - समाप्त
विश्वस्नीय शेर - हिंदी कहानी - लघु कथा
इससे शेर को काफी राहत मिला और इस प्रकार दोनों में दोस्ती भी हो गयी। शेर उसे माँस लाकर देता रहता और इस प्रकार उसने काफी समय जंगल में बिताया। फिर उसने सोचा कि इस तरह का जीवन कब तक जीता रहूंगा। एक दिन शेर शिकार पर गया था कि एण्डलोकल्स वहाँ से भागकर पुनः रेगिस्तान होते हुए उसी राजा के राज्य होते हुए जा रहा था। किसी गुप्तचर ने उसे पकड़कर राजा के पास ले आया। राजा ने उसे कहा कि एक मात्र भाला देकर अपनी जान की रक्षा उस भूखे शेर से करेगा। उस खूंखार शेर के सामने एण्डलोकल्स को राजा के आदेश पर जाना पड़ा। चारों ओर राजदरबार लगा था। सभी देखने वाली जनता भी दंग रह गई कि आखिर भूखा शेर उसे क्यों नहीं खाया। शेर उसे देखकर छोड़ दिया। बाद में पता चला कि शेर के साथ उस लड़के की दोस्ती थी। जिनके कारण शेर उसे नहीं मारा।इसका मतलब शेर भी इतना विश्वनीय होता है कि अपना खूंखार लक्षण छोड़कर दोस्ती का फर्ज निभाता है।
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विश्वस्नीय शेर - हिंदी कहानी - लघु कथा - समाप्त
मंगलवार, 1 अगस्त 2017
माहात्मा जी का तोता - हिंदी कहानी
प्राचीन काल मे किसी महात्मा ने एक तोता को पिंजरे में पलता था। वह तोता महात्मा जी से काफी गुण की बात सीख चुका था। महात्मा जी उसे काफी श्रद्धा से पालते थे और काफी गुणवान बना चुके थे।
परंतु एक दिन महात्मा जी ने सोचा कि मैंने जो पाठ पढ़ाया है उसे तोता सही में स्मरण किआ है या नही। या ओर यूं ही रट लिए हैं। एक न इसकी परीक्ष ली जाय। उसने एक शिकारी को बुलाकर कहा कि मैंने एक पाला है। जिसे गुणवान बनाकर जंगल मे छोड़ दिया है। जिसके कारण जंगल के अन्य तोते पर इसका प्रभाव परे।
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इस बात पर महात्मा जी ने कहा कि क्या तुमने सचमुच जाल बिछाकर देखा था।? तो शिकारी ने कहा कि नहीं। इसपर महात्मा ने कहा कि ऐसा करके तो देखो। फिर शिकारी पुनः जंगल गया और जाल बिछाकर दाना डालकर देखा। तो धीरे धीरे बहुत से तोता यह बात रट भी रहा था और जाल के अन्दर आकर दाना चुग भी रहा था। इस तरह बहुत से तोता जाल में फास गये, जिसमें महात्मा जी का भी तोता था। जब शिकारी जाल लेकर महात्मा के पास आया तो तोता घबरा गया और सरमाया हुआ सा बैठ गया। इसपर महात्मा ने कहा, तोता रटने से कोई लाभ नहीं, जब तक कि उसे आत्मसात नहीं कर लेते।
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समाप्त - महात्मा जी का तोता - हिंदी कहानी
परंतु एक दिन महात्मा जी ने सोचा कि मैंने जो पाठ पढ़ाया है उसे तोता सही में स्मरण किआ है या नही। या ओर यूं ही रट लिए हैं। एक न इसकी परीक्ष ली जाय। उसने एक शिकारी को बुलाकर कहा कि मैंने एक पाला है। जिसे गुणवान बनाकर जंगल मे छोड़ दिया है। जिसके कारण जंगल के अन्य तोते पर इसका प्रभाव परे।
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महात्मा जी का तोता
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शिकारी जब जंगल जाकर देखा तो सभी तोता एक ही रट लगा रहे थे, शिकारी आयेगा, जाल बिछाएगा, लोभ में फसाना नहीं। यह सुनकर शिकारी जंगल से लौट आता है और महात्मा जी से कहता है कि तोता तो पहले से ही रट लगा रहे हैं कि तोता आयेगा, जाल बिछएगा, लोभ में फसना नहीं। भला वो सब तोता जाल में कैसे फास सकते हैं।इस बात पर महात्मा जी ने कहा कि क्या तुमने सचमुच जाल बिछाकर देखा था।? तो शिकारी ने कहा कि नहीं। इसपर महात्मा ने कहा कि ऐसा करके तो देखो। फिर शिकारी पुनः जंगल गया और जाल बिछाकर दाना डालकर देखा। तो धीरे धीरे बहुत से तोता यह बात रट भी रहा था और जाल के अन्दर आकर दाना चुग भी रहा था। इस तरह बहुत से तोता जाल में फास गये, जिसमें महात्मा जी का भी तोता था। जब शिकारी जाल लेकर महात्मा के पास आया तो तोता घबरा गया और सरमाया हुआ सा बैठ गया। इसपर महात्मा ने कहा, तोता रटने से कोई लाभ नहीं, जब तक कि उसे आत्मसात नहीं कर लेते।
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समाप्त - महात्मा जी का तोता - हिंदी कहानी
रविवार, 3 अप्रैल 2016
हिंदी कहानी - स्वभाव में परिर्वतन न होना
एक दिन एक साधू गंगा स्नान
कर रहा था। उसने देखा कि एक बिच्छु जल धारा में बहता जा रहा था । उसने साधू को
उसपर दया आ
रविवार, 27 मार्च 2016
हिंदी कहानी - मेहनत का फल - Hindi Stories
एक अमीर आदमी को दो पुत्र
थे। उस आदमी का नाम नागेश्वर था। वह अपने पुत्रों को बहुत प्यार करता था। इस लार
प्यार के कारण वे दोनों लङके जीवन में कोई काम नहीं सीखा।
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