एक बंदर नदी के किनारे एक आम के पेड़ पर रहता था। वह प्रतिदिन पेड़ से आम मौसम पर मीठा खाता था और अपने मित्र मगरमच्छ को भी खिलाता था। उसका मित्र मगरमच्छ उसे बहुत प्यार करता था।
शुक्रवार, 10 नवंबर 2017
गुरुवार, 9 नवंबर 2017
ब्यूटी और गुलाब की कथा - हिंदी कहानी
प्राचीन काल में एक सौदागर के तीन लड़कियाँ थी। सौदागर नाकुरी छोड़कर घर बैठे हुए थे। वह किसी दुसरे नॉकरी की तलाश में था।
बुधवार, 8 नवंबर 2017
विश्वस्नीय शेर - हिंदी कहानी - लघु कथा
अंडलोकल्स नाम का एक लड़का इंग्लैण्ड के राजा के यहां नॉकरी करता था। वह बहुत समय के बाद राजा के यहां नॉकरी छोड़कर भागते भागते रेगिस्तान होते हुए बहुत दूर एक जंगल में जा छिपा। जंगल में एक शेर आह भरता हुआ कहरता हुआ एक पैर उठाये चले आ रहा था। यह देखकर पहले तो एण्डलोकल्स डर गया, परंतु फिर उसने सोचा यहां से भागकर कहां जाया जाय। वो हिम्मत करके शेर के पास गया और उसके पैर में चुभा काँटा निकाल दिया और जड़ी बूटी का लेप भी लगा दिया।
इसका मतलब शेर भी इतना विश्वनीय होता है कि अपना खूंखार लक्षण छोड़कर दोस्ती का फर्ज निभाता है।
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विश्वस्नीय शेर - हिंदी कहानी - लघु कथा - समाप्त
विश्वस्नीय शेर - हिंदी कहानी - लघु कथा
इससे शेर को काफी राहत मिला और इस प्रकार दोनों में दोस्ती भी हो गयी। शेर उसे माँस लाकर देता रहता और इस प्रकार उसने काफी समय जंगल में बिताया। फिर उसने सोचा कि इस तरह का जीवन कब तक जीता रहूंगा। एक दिन शेर शिकार पर गया था कि एण्डलोकल्स वहाँ से भागकर पुनः रेगिस्तान होते हुए उसी राजा के राज्य होते हुए जा रहा था। किसी गुप्तचर ने उसे पकड़कर राजा के पास ले आया। राजा ने उसे कहा कि एक मात्र भाला देकर अपनी जान की रक्षा उस भूखे शेर से करेगा। उस खूंखार शेर के सामने एण्डलोकल्स को राजा के आदेश पर जाना पड़ा। चारों ओर राजदरबार लगा था। सभी देखने वाली जनता भी दंग रह गई कि आखिर भूखा शेर उसे क्यों नहीं खाया। शेर उसे देखकर छोड़ दिया। बाद में पता चला कि शेर के साथ उस लड़के की दोस्ती थी। जिनके कारण शेर उसे नहीं मारा।इसका मतलब शेर भी इतना विश्वनीय होता है कि अपना खूंखार लक्षण छोड़कर दोस्ती का फर्ज निभाता है।
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विश्वस्नीय शेर - हिंदी कहानी - लघु कथा - समाप्त
रविवार, 5 नवंबर 2017
विश्वसहिंता की कथा - हिंदी कहानी
किसी गांव में एक पति-पत्नी रहते थे। वे एक नेवला पलता था। एक दिन पति काम करने बाहर चले गए थे और पत्नी शारदा अपने बेटे को पालना में सुलाकर पानी लेने किसी कुँए पर चली गई। नेवला पालना के आसपास घूम रहा था। संजोग से एक सर्प कहीं से आकर पालना के पास जा रहा था। यह देख नेवला साँप से लड़ाई कर उसे मार डाला। और बाहर दरवाजे पर अपनी मालकिन की वाट देखने लगा। शारदा जब पानी लेकर आई तो देखा कि नेवला दरवाजे पर इधर उधर घूम रहा है और उसके मुंह पर खून लगा है। यह देखते ही शारदा ने सोचा की मेरे पुत्र को मार डाला। यह सोच उसने पानी का घड़ा नेवले पर पटक दिया। नेवला वहीं पर मर गया। जब शारदा ने घर में प्रवेश किया तो देखा की उसका पुत्र पालना पर खेल रहा है और वहीं पर साँप मरा पड़ा है।
यह देखकर शारदा को बहुत दुःख हुआ और रोने लगी।
शिक्षा: बिना सोचे समझे कोई काम उतावला होकर नहीं करना चाहिए।
विश्वसहिंता की कथा - समाप्त
यह देखकर शारदा को बहुत दुःख हुआ और रोने लगी।
शिक्षा: बिना सोचे समझे कोई काम उतावला होकर नहीं करना चाहिए।
विश्वसहिंता की कथा - समाप्त
गुरुवार, 2 नवंबर 2017
लकड़ी का घोड़ा - हिंदी कहानी
एक बार बहुत वर्ष पहले जर्मनी और फ्रांस की राजधानी पेरिस में घमासान युद्ध चल रहा था। जर्मनी पेरिस पर करीब दस वर्षों से युद्ध चल रहा था। एक दिन जर्मनी के राजा ने पेरिस के राजा को गिफ्ट दिया कि उसने एक बड़ा सा लकड़ी का घोड़ा बनवाकर उसके राज्य में छोड़ दिया। और अपने सैनिकों को सुबह ही हवाई जहाज से वापस भेज रहे थे। परंतु लकड़ी के घोड़े के अंदर दो तीन सैनिकों को छोड़ रखे थे।
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लकड़ी का घोड़ा - समाप्त
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लकड़ी का घोड़ा
यह किसी को भी जानकारी नहीं थी। यह दृश्य देखकर पेरिस के राजा एवं जनता में हर्ष की लहर छा गये और बोलने लगे जर्मनी वाले भाग गये। खूब हर्षोल्लास का वातावरण हो गया। इस तरह रात्रि का समय आ गया। घोड़े के अंदर के सैनिकों ने जब देखा की वातावरण शांत हो गया है तो घोड़े से सैनिक निकालकर दुर्ग का फाटक खोल दिए। जिससे जर्मनी के सैनिकों ने पुनः उनके देश मे आ धमके। और मार काट करना सुरु कर दिया। इस तरह से जर्मनी फ्रांस की राजधानी पेरिस पर कब्जा कर लिया। और वहाँ की रानी हेलनवाई को जनार्दस्ती जर्मनी लेकर चला गया। इस तरह जर्मनी ने फ्रांस पर अपना अधिकार जमा लिया और फ्रांस को जीतकर अपने देश मे मिला लिया।----------------------------------
लकड़ी का घोड़ा - समाप्त
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रविवार, 22 अक्टूबर 2017
महाभारत की पूरी कहानी - शूरुआत - भाग 1
एक बार स्वर्ग लोक में सभा हो रही थी। जिसमें सभी देवतागण उपस्थित थे। उसी समय सभा के बीच में ब्रह्मा जी की पुत्री ब्रम्हा जी से कुछ कहने आये थे। उनकी पुत्री का संजोग से हवा की झोंक के कारण दुप्पटा निचे गिर गया। सभी देवताओं का सिर निचे झुक गया। परन्तु एक देवता का सिर नहीं झुका। बल्कि वह उनकी पुत्री को देखते ही रह गए। तब इसपर ब्रम्हा जी क्रोधित होकर अपनी पुत्री और उस देवता को श्राप दिया कि पृथ्वी लोक पर जन्म लेकर कस्ट भोगना पड़ेगा। उनकी पुत्री की गंगा बनकर आयी और वह देवता राजा शान्तनु बना। राजा शान्तनु गंगा से शादी करना चाहता था, परंतु गंगा ने शर्त रख दी मैं आपके यहाँ तब तक रहूंगी जब तक मेरे ऊपर अंकुश नहीं डालोगे। जिसदिन मेरी इच्छा के अनुसार मुझे काम नहीं करने दोगे उसी वक्त मैं तुम्हें छोड़कर चली जाउँगी। राजा शान्तनु ने शर्त मंजूर कर लिया।
महाभारत की पूरी कहानी - शूरुआत - भाग 1
राजा शान्तनु से गंगा को एक पुत्र प्राप्त हुआ। गंगा ने उसे गंगा नदी में डाल आयी। राजा इसपर कुछ नहीं बोला। पुनः दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवें, छठे, सातवें पुत्र को गंगा नदी में डाल आयी। परन्तु जब आठवें पुत्र को भी गंगा जब नदी में बहाने जा रही थी तो राजा शान्तनु ने इस बार रोक लिया। इसपर गंगा बोली कि शर्त के अनुसार मैं आपको छोड़कर जा रही हूँ, जहाँ तक इस बालक की बात है तो मैं इसे पाल पोसकर एवं सभी विद्या से निपुण करके आपके पास छोड़ जाउँगी।गंगा ने ऐसा ही किया। एक दिन गंगा तट पर जब राजा शान्तनु टहल रहे थे, उसी समय गंगा अपने पुत्र देवव्रत को लेकर राजा शान्तनु के पास छोड़कर स्वयं लुप्त हो गयी।
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महाभारत की पूरी कहानी - शूरुआत - भाग 1
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गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017
मूर्ख कौवा और लोमड़ी - हिंदी कहानी - लघु कथा
एक कौवा कहीं से एक रोटी का टुकड़ा पाया था और उसे वो पेर की डाली पर बैठकर कहा रहा था। उसी समय एक लोभी लोमड़ी पेड़ के निचे आ धमका। लोमड़ी ने सोचा कि किसी तरह से कौवा के चोंच से रोटी का टुकड़ा लेना है।
लोमड़ी ने कौवा की तारीफ करना सुरु कर दिया। उसने कौवा भाई से कहा , कौवा भाई मैंने सुना है कि आपकी मधुर वाणी सबको मोहित कर देती है। खासकर में आपकी मधुर वाणी सुनने को हमेशा ललायित रहता हूँ। कृप्याकर अपनी मधुरवानी सुनाने का कष्ट करेंगें।
कौवा अपनी तारीफ सुनकर बेहद प्रसन्न हुआ और मुह खोलकर जैसे ही क्वान क्वान का आवाज़ किया कि उसके मुंह से रोटी निचे गिर गई। लोमड़ी चतुराई से रोटी प्राप्त किया और वहाँ से भाग निकला। कौवा बेचारा पछताता रह गया।
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मूर्ख कौवा और लोमड़ी - हिंदी कहनी - लघु कथा
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लोमड़ी ने कौवा की तारीफ करना सुरु कर दिया। उसने कौवा भाई से कहा , कौवा भाई मैंने सुना है कि आपकी मधुर वाणी सबको मोहित कर देती है। खासकर में आपकी मधुर वाणी सुनने को हमेशा ललायित रहता हूँ। कृप्याकर अपनी मधुरवानी सुनाने का कष्ट करेंगें।
कौवा अपनी तारीफ सुनकर बेहद प्रसन्न हुआ और मुह खोलकर जैसे ही क्वान क्वान का आवाज़ किया कि उसके मुंह से रोटी निचे गिर गई। लोमड़ी चतुराई से रोटी प्राप्त किया और वहाँ से भाग निकला। कौवा बेचारा पछताता रह गया।
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मूर्ख कौवा और लोमड़ी - हिंदी कहनी - लघु कथा
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