सोमवार, 21 अगस्त 2017

दो तोते की कहानी और किस्सा

किसी जंगल में दो तोता रहते थे, वे बहुत ही आनंद पूर्वक जीवन यापन कर रहे थे।
परंतु एक दिन संयोग बस आंधी तूफान जोड़ों से चलने लगी, तोते का जोड़ी बिछड़ गया। एक बड़ा तोता महात्मा के यहां पलने लगा और दूसरा तोता एक डाकू के घर। दोनों तोते में अलग अलग गुण भरने लगे। महात्मा के घर तोते में परोपकारी गुण का समावेश होने लगा और डाकु के घर पलने वाला तोता काटो, मारो, पकड़ो, छीना-झपटी का गुण का समावेश होने लगा। इसलिए कहा गया है कि - जैसे का अन्न खाय उसका मन भी उसी तरह का हो जाता है, जैसा पानी पीयें वैसा ही वणी बन जाता है। यह तो सर्व व्यापी गुण है। वही गुण तोते में आ जाने से कोई सुख प्राप्त कर रहा है तो कोई दुख।

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समाप्त - दो तोते की कहानी और किस्सा
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- कहा गया है कि आत्मज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा ज्ञान है ही नहीं। यह गुण सर्व सर्वदा मान्य है और रहेगा।
- प्रत्येक बच्चे में उसकी प्रतिभा छिपा रहता है जो आगे चलकर निखरता है और श्रेस्ठ दुनिया बनाता है।
- मनुष्य, मनुष्य से प्रेम नहीं करता ये सबसे बड़ा विसमता है, जबकि प्रकृति के अन्य सभी जीव जंतुओं में ऐसा नहीं देखा जाता है। उनसब में प्रायः सारभामिक प्रेम देखा जाता है।

मंगलवार, 1 अगस्त 2017

माहात्मा जी का तोता - हिंदी कहानी

प्राचीन काल मे किसी महात्मा ने एक तोता को पिंजरे में पलता था। वह तोता महात्मा जी से काफी गुण की बात सीख चुका था। महात्मा जी उसे काफी श्रद्धा से पालते थे और काफी गुणवान बना चुके थे।
परंतु एक दिन महात्मा जी ने सोचा कि मैंने जो पाठ पढ़ाया है उसे तोता सही में स्मरण किआ है या नही। या ओर यूं ही रट लिए हैं। एक न इसकी परीक्ष ली जाय। उसने एक शिकारी को बुलाकर कहा कि मैंने एक पाला है। जिसे गुणवान बनाकर जंगल मे छोड़ दिया है। जिसके कारण जंगल के अन्य तोते पर इसका प्रभाव परे।
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महात्मा जी का तोता

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शिकारी जब जंगल जाकर देखा तो सभी तोता एक ही रट लगा रहे थे, शिकारी आयेगा, जाल बिछाएगा, लोभ में फसाना नहीं। यह सुनकर शिकारी जंगल से लौट आता है और महात्मा जी से कहता है कि तोता तो पहले से ही रट लगा रहे हैं कि तोता आयेगा, जाल बिछएगा, लोभ में फसना नहीं। भला वो सब तोता जाल में कैसे फास सकते हैं।
इस बात पर महात्मा जी ने कहा कि क्या तुमने सचमुच जाल बिछाकर देखा था।? तो शिकारी ने कहा कि नहीं। इसपर महात्मा ने कहा कि ऐसा करके तो देखो। फिर शिकारी पुनः जंगल गया और जाल बिछाकर दाना डालकर देखा। तो धीरे धीरे बहुत से तोता यह बात रट भी रहा था और जाल के अन्दर आकर दाना चुग भी रहा था। इस तरह बहुत से तोता जाल में फास गये, जिसमें महात्मा जी का भी तोता था। जब शिकारी जाल लेकर महात्मा के पास आया तो तोता घबरा गया और सरमाया हुआ सा बैठ गया। इसपर महात्मा ने कहा, तोता रटने से कोई लाभ नहीं, जब तक कि उसे आत्मसात नहीं कर लेते।

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समाप्त - महात्मा जी का तोता - हिंदी कहानी